यूपी पंचायत चुनाव में हो सकती है देरी, ओबीसी आरक्षण रिपोर्ट बनी बड़ी वजह

यूपी पंचायत चुनाव समय पर होंगे या नहीं? ओबीसी आरक्षण रिपोर्ट की वजह से चुनाव टलने की संभावना है। पूरी जानकारी यहाँ पढ़ें।

Shubham Singh6 November 20262 min read0 viewsउत्तर प्रदेश
यूपी पंचायत चुनाव में हो सकती है देरी, ओबीसी आरक्षण रिपोर्ट बनी बड़ी वजह

उत्तर प्रदेश में होने वाले पंचायत चुनावों को लेकर सस्पेंस बढ़ गया है। ऐसा लग रहा है कि यूपी पंचायत चुनाव देरी का शिकार हो सकते हैं। दरअसल, ओबीसी आरक्षण की रिपोर्ट तैयार करने में समय लग रहा है, जिसकी वजह से चुनाव की तय समयसीमा को पूरा करना प्रशासन के लिए मुश्किल होता दिख रहा है।

मामला इस बात का है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 14 अक्टूबर को एक आदेश जारी किया था, जिसमें सरकार को तीन महीने के भीतर चुनाव कराने का निर्देश दिया गया था। लेकिन अब यह उम्मीद कम होती जा रही है कि चुनाव समय पर संपन्न होंगे। इस देरी के पीछे मुख्य कारण पिछड़ा वर्ग आयोग का काम है, जिसे ओबीसी आरक्षण के मानदंडों को तय करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

आरक्षण रिपोर्ट और समय की चुनौती

पिछड़ा वर्ग आयोग फिलहाल अपनी रिपोर्ट तैयार करने में जुटा है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि इस पूरी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अभी कम से कम तीन महीने का अतिरिक्त समय चाहिए। आयोग अब राज्य सरकार से समय सीमा बढ़ाने की औपचारिक मांग करने की तैयारी कर रहा है। वहीं, राज्य सरकार इस रिपोर्ट की अनुपस्थिति को आधार बनाकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपनी बात रखने की योजना बना रही है।

आयोग की कार्यप्रणाली पर नजर डालें तो 14 अक्टूबर तक उसने 42 जिलों का दौरा किया था, जो अब बढ़कर 52 जिले हो गया है। बता दें कि राज्य सरकार ने 20 जून को इस आयोग का गठन किया था और इसे findings जमा करने के लिए छह महीने का समय दिया गया था, जिसकी अवधि 20 नवंबर को समाप्त हो रही है।

दिलचस्प बात यह है कि पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने पहले भरोसा दिलाया था कि चुनाव समय पर कराए जाएंगे। दूसरी ओर, वर्तमान ग्राम प्रधानों का छह महीने का कार्यकाल, जिनमें वे प्रशासक के रूप में काम कर रहे हैं, 26 नवंबर को खत्म होने वाला है। अब सबकी नजरें सरकार और कोर्ट के अगले कदम पर टिकी हैं।

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